shant ras ka udaharan - शांत रस के उदाहरण

Arpit Nageshwar
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शांत रस के उदाहरण

हिंदी काव्यशास्त्र में शांत रस वह रस है जिसमें मन की शांति, वैराग्य, संतोष और आध्यात्मिक आनंद का भाव प्रकट होता है। जब किसी कविता, दोहे या साहित्य को पढ़ने से मन में शांति और संसार के प्रति विरक्ति का भाव उत्पन्न हो, तब वहाँ शांत रस पाया जाता है।

शांत रस के उदाहरण अक्सर संत कवियों, भक्त कवियों और आध्यात्मिक साहित्य में देखने को मिलते हैं। कबीर, तुलसीदास, रहीम और अन्य संत कवियों की रचनाओं में शांत रस के अनेक सुंदर उदाहरण मिलते हैं।

शांत रस का उदाहरण

“माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर। कर का मनका छोड़ दे, मन का मनका फेर॥” — कबीर

इस प्रसिद्ध दोहे में संत कबीर ने बाहरी पूजा-पाठ की अपेक्षा मन की शुद्धता और आंतरिक शांति पर बल दिया है। कबीर कहते हैं कि केवल हाथ से माला फेरने से कुछ नहीं होता, बल्कि मन को बदलना आवश्यक है।

यह विचार मनुष्य को आत्मचिंतन और आंतरिक शांति की ओर ले जाता है, इसलिए यह शांत रस का सुंदर उदाहरण है।

शांत रस के 10 उदाहरण

शांत रस के प्रमाणिक उदाहरण (Verified Shant Ras Examples)

उदाहरण 1

"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥"
— ग्रंथ: भगवद्गीता (अध्याय 2, श्लोक 47)
व्याख्या: इस श्लोक में श्रीकृष्ण अर्जुन को निष्काम कर्म का उपदेश देते हैं। फल की चिंता छोड़कर कर्म करने से मन में आसक्ति समाप्त होती है और व्यक्ति को मानसिक शांति प्राप्त होती है। 👉 यहाँ वैराग्य + स्थिरताशांत रस

उदाहरण 2

"न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।"
— भगवद्गीता (अध्याय 4)
व्याख्या: ज्ञान को सबसे पवित्र बताया गया है। ज्ञान प्राप्त होने पर मोह और अज्ञान समाप्त हो जाता है, जिससे मन शांत हो जाता है। 👉 आत्मज्ञानशांत रस

उदाहरण 3

"अहिंसा परमो धर्मः"
— महाभारत
व्याख्या: अहिंसा को सर्वोच्च धर्म बताया गया है। हिंसा का त्याग और करुणा का भाव मन में शांति स्थापित करता है। 👉 करुणा + वैराग्यशांत रस

उदाहरण 4

"शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्।"
— विष्णु स्तुति
व्याख्या: भगवान विष्णु के शांत स्वरूप का वर्णन किया गया है। यह पूर्ण स्थिरता, संतुलन और आध्यात्मिक शांति का प्रतीक है। 👉 आध्यात्मिक शांतिशांत रस

उदाहरण 5

"जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहीं।"
— कबीरदास
व्याख्या: यहाँ अहंकार के समाप्त होने पर ईश्वर की प्राप्ति का भाव है। अहंकार त्याग से मन में गहरी शांति उत्पन्न होती है। 👉 अहंकार त्यागशांत रस

उदाहरण 6

"माया मरी न मन मरा, मर-मर गए शरीर।"
— कबीरदास
व्याख्या: संसार की नश्वरता का बोध कराया गया है। यह ज्ञान व्यक्ति को वैराग्य की ओर ले जाता है, जिससे शांति मिलती है। 👉 वैराग्यशांत रस

उदाहरण 7

"साईं इतना दीजिए, जामे कुटुम समाय।
मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय॥"
— कबीरदास
व्याख्या: संतोष और संतुलन का भाव है। अधिक की इच्छा नहीं, केवल आवश्यकता भर — यही मन की शांति का आधार है। 👉 संतोषशांत रस

उदाहरण 8

"रहिमन धागा प्रेम का मत तोरो चटकाय।"
— रहीम
व्याख्या: संबंधों में संतुलन और संयम का संदेश दिया गया है। संयमित जीवन शांति की ओर ले जाता है। 👉 संयमशांत रस

उदाहरण 9

"सब दिन होत न एक समान।"
— रहीम
व्याख्या: जीवन की अस्थिरता का बोध कराता है। इस सत्य को स्वीकार करने से मन शांत रहता है। 👉 स्वीकार भावशांत रस

उदाहरण 10

"नर हो, न निराश करो मन को।"
— मैथिलीशरण गुप्त
व्याख्या: धैर्य और आत्मविश्वास का संदेश है। कठिन परिस्थितियों में भी मानसिक संतुलन बनाए रखना शांत रस को प्रकट करता है। 👉 धैर्यशांत रस

शांत रस के 20 उदाहरण

नीचे शांत रस के कुछ और उदाहरण दिए जा रहे हैं जो परीक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं।

  • उदाहरण 11 : “साधु गंगा के तट पर ध्यान में बैठा था।”
  • उदाहरण 12 : “संसार की वस्तुएँ नश्वर हैं।”
  • उदाहरण 13 : “संतोष से मन को शांति मिलती है।”
  • उदाहरण 14 : “त्याग ही सच्चा सुख देता है।”
  • उदाहरण 15 : “ध्यान से मन स्थिर हो जाता है।”
  • उदाहरण 16 : “संतों के वचन मन को शांत करते हैं।”
  • उदाहरण 17 : “अहंकार छोड़ने से जीवन सरल हो जाता है।”
  • उदाहरण 18 : “वैराग्य से मनुष्य को सच्चा आनंद मिलता है।”
  • उदाहरण 19 : “संत का जीवन सादा और शांत होता है।”
  • उदाहरण 20 : “ईश्वर भक्ति से मन को शांति मिलती है।”

5.3 शांत रस का सरल उदाहरण

“संतोषी सदा सुखी।”

यह बहुत छोटा लेकिन गहरा अर्थ रखने वाला वाक्य है। इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति संतोषी होता है, वह हमेशा सुखी और शांत रहता है।

इस वाक्य में संतोष और मानसिक शांति का भाव है, इसलिए यह शांत रस का सरल उदाहरण माना जाता है।


Arpit Nageshwar

✍️ Arpit Nageshwar

Post-graduated | Web Developer | +3 yr Experience